विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख अक्टूबर से जाकर पलटा है। अन्यथा, वे जनवरी 2018 से लेकर 21 महीनों तक भारतीय शेयर बाज़ार से बराबर धन निकालने के ही मूड में नज़र आए। फिर भी इस दौरान सेंसेक्स व निफ्टी 15% से ज्यादा कैसे और क्यों बढ़ गए? रिटेल निवेशक तो इस दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स को लग रही मार से धराशाई हुए पड़े थे। फिर किसने चढ़ाया बाज़ार के संवेदी सूचकांकों को? अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी