भ्रष्ट तंत्र में खुद निकालें नई राह
2019-09-29
हमारा समूचा वित्तीय-तंत्र भ्रष्ट है। बड़ों के हितों का पोषण और आम लोगों का शिकार करता है। यह हर्षद मेहता के समय से चल रहा है और आज भी बदस्तूर जारी है। वित्तीय साक्षरता का नारा यूपीए सरकार लगाती थी और एनडीए सरकार भी नकारती नहीं। लेकिन असली खेल से अनजान लोगों की लालच का फायदा उठाकर उन्हें ठगा जा रहा है। हमें यह जाल तोड़कर खुद नई राह निकालनी होगी। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी


