शेयर बाज़ार में मंदी के दौर का स्वभाव तेज़ी के दौर से एकदम उलटा होता है। मंदी में बाज़ार धीरे-धीरे नहीं, एकबारगी गिरता है। अक्सर होता यह है कि एक-दो साल में बाजार या कोई स्टॉक जितना बढ़ा होता है, वह सारी की सारी बढ़त चंद दिनों में स्वाहा हो जाती है। बहुत सारे स्टॉक्स धारदार चाकू की तरह गिरते हैं, जिन्हें पकड़ने की कोशिश में घाव और गहरे होते चले जाते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी