भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बजट कितना कारगर होगा, यह कम से कम एक साल बाद पता चलेगा। लेकिन शेयर बाज़ार के लिए तो वह हफ्ते भर में ही इतिहास बन चुका है। ट्रेडर और निवेशक अब बजट के प्रस्तावों से बाहर निकलकर अन्य मसलों पर गौर करने लगे हैं। जैसे, कंपनियों के तिमाही नतीजे, दुनिया में चल रहे व्यापार युद्ध, मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव और अलग-अलग उद्योगों की स्थिति क्या चल रही है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी