पैर अभी से निकल गए चादर से बाहर
2019-07-04
हमें बहुत फर्क नहीं पड़ता कि सरकार टैक्स का धन खर्च करे या उधारी का। लेकिन आईएमएफ, विश्व बैंक, रेटिंग एजेंसियों, अर्थशास्त्रियों व विदेशी निवेशकों को इस बात से बहुत फर्क पड़ता है कि सरकार अपना खर्च पूरा करने के लिए कितना उधार ले रही है। यह स्थिति बजट में राजकोषीय घाटे से सामने आती है। इस बार अप्रैल-मई में ही अंतरिम बजट में तय राजकोषीय घाटे का 52% खर्च हो चुका है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

