हर घबराहट के बाद शांत होता बाज़ार
क्या यह हमारे शेयर बाज़ार में लंबे करेक्शन या गिरावट का आगाज़ तो नहीं? या, यह अल्पकालिक डुबकी है जिसमें तमाम शेयरों पर चढ़ी चर्बी छंट जाएगी और वे निवेश या ट्रेडिंग के अच्छे स्तर पर आ जाएंगे? वैसे भी, हर हड़बड़ाहट के बाद सामान्य व शांत हो जाना बाज़ार का स्वभाव है। बाज़ार के इस स्वभाव को हमें संपूर्णता में समझना होगा। अन्यथा, तात्कालिकता में उलझकर हम अक्सर संतुलन खो देते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
गिरावट हुई है ज्यादा वोल्यूम के साथ
खास बात यह है कि 3 से 10 मई तक बाज़ार की गिरावट कम नहीं, बल्कि ज्यादा वोल्यूम के साथ हुई है। 3 मई को निफ्टी-50 के 30.55 करोड़ शेयरों में ट्रेडिंग हुई थी और उसका वोल्यूम 15,156.32 करोड़ रुपए था। वहीं, 10 मई को निफ्टी-50 के 38.73 करोड़ शेयरों में ट्रेडिंग हुई और उसका वोल्यूम 18,085.19 करोड़ रुपए रहा। निफ्टी तो गिरा 3.80%, लेकिन वोल्यूम 19.32% बढ़ गया! यह क्या दिखाता है? अब मंगलवार की दृष्टि…और भीऔर भी
क्या कहती है बाज़ार की यह गिरावट!
जब हर तरफ मोदी सरकार का दोबारा सत्ता में आना लगभग तय माना जा रहा है, तब आखिर 3 मई के बाद से हमारा शेयर बाज़ार बराबर क्यों रपट रहा है? छह दिनों की ट्रेडिंग में निफ्टी 3.80% टूट गया। अगस्त 2011 के बाद बाज़ार केवल बारह बार इतने कम समय में इतना ज्यादा गिरा है। कहीं उसे पूर्वाभास तो नहीं हो गया कि ‘फिर एक बार, मोदी सरकार’ नहीं बनने जा रही! अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
मौके साथ लाए हैं शानदार तोहफा
शेयर बाज़ार में छाए मौजूदा उन्माद व सन्निपात के बीच तमाम मजबूत व अच्छी कंपनियां सबकी नज़रों से ओझल पड़ी हैं। अगर ऐसी कंपनियों की सही शिनाख्त कर ली जाए तो वे निवेशकों के लिए दौलत बनाने व बढ़ाने का काम कर सकती हैं। सामान्य निवेशकों के लिए ऐसे मौके शानदार तोहफा लेकर आते हैं। इन्हें पकड़ने के लिए ज़रूरी है कि हम शोर के बीच सच का सूत्र पकड़ लें। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी







