सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव परिणाम आ चुके हैं। देश में करोड़ों दिलों की रुकी हुई घड़कनें अब चलने लगी हैं और दिमाग काम करने लगा है। इसलिए फेंकने-हांकने या हवाहवाई बातें करने के बजाय उस ठोस कार्यभार को समझने की ज़रूरत है जो देश की नई सरकार के सामने मौजूद है। समय बहुत कम है क्योंकि तीन साल बाद ही 2022 में हम आज़ादी की 75वीं सालगिरह मनाने जा रहे हैं। तीन साल में नया भारत बनाऔरऔर भी

राजनेता अपनी ताकत चुनावों में जनता के वोट पाकर हासिल करते हैं। जनता के बम्पर वोट मिलने से ही उनकी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। लिस्टेड कंपनियां भी शेयर बाजार के ज़रिए निवेशकों से पूंजी, साख व ताकत हासिल करती हैं। साख व ताकत बढ़ने से उनके शेयर का मूल्य बढ़ता है। इससे कंपनी के साथ उसके शेयरधारकों को भी लाभ मिलता है और दोनों साथ-साथ जीतते चले जाते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी