बाज़ार में अजीव-सा उन्माद/सन्निपात छाया है। इस वास्तविकता को कोई तवज्जो नहीं दे रहा कि शेयर बाज़ार हमेशा चक्रों में चलता है। तेज़ी के बाद मंदी का दौर आता ही है। न मंदी अनंत समय तक चलती है और न ही तेज़ी। उसी तरह जैसे सर्दियों के बाद गरमियां अनिवार्यतः आती हैं। मंदी बाज़ार के मूल्यांकन को वाजिब व तर्कसंगत स्तर पर ले आती है। लेकिन तेजी से उत्साहित ट्रेडर समझते ही नहीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी