शेयरों के भावों पर सबसे ज्यादा सटीक असर पड़ता है खबरों का। ये खबरें कंपनी के कामकाज, सरकारी नीति और किसी बड़े निवेशक या देशी-विदेशी संस्था द्वारा उसके शेयर खरीदने से संबंधित हो सकती हैं। दिक्कत यह है कि ये खबरें जब हम तक पहुंचती हैं, तब तक बाज़ार में उनका पूरा असर हो चुका होता है। रिटेल ट्रेडर कभी भी खबरों पर नहीं खेल सकता। भावों का पैटर्न ही उसका सहारा है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बात बड़ी सीधी-सी है कि अगर खरीदनेवालों का ज़ोर ज्यादा हुआ और बेचने का उत्साह कम रहा तो शेयर के भाव बढ़ते जाते हैं क्योंकि लोग ज्यादा भाव लगाकर बेचनेवाले के लालच को बढ़ावा देते हैं। लेकिन किसी वजह से लोग खरीदने के बजाय बेचकर मुनाफावसूली पर उतर आए तो शेयर धड़ाम हो जाता है। तब, पुराने पैटर्न के विश्लेषण पर टिकी सारी गणनाएं फेल हो जाती हैं और तगड़ा झटका लगता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयरों से लेकर कमोडिटी और फॉरेक्स बाज़ार तक ट्रेडर टेक्निकल एनालिसिस का सहारा लेते हैं। करीब 400 साल पहले जापान में चावल के थोक व्यापार में कैंडल-स्टिक पैटर्न से शुरू हुई यह विद्या आज बहुत सारे संकेतकों तक पहुंच चुकी है। इसमें पिछले पैटर्न के आधार पर भावों की नई चाल का अनुमान लगाते हैं। लेकिन यह दिल को महज दिलासा ही दिलाती है क्योंकि भाव पिछले पैटर्न पर चलें, यह ज़रूरी नहीं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

इंसान किसी काम में माहिर नहीं हो जाता, तब तक उसे बाहरी मदद की दरकार रहती है। यह बड़ी स्वाभाविक इच्छा है। शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग की शुरुआत में भी टिप्स पाने की इच्छा जगती है। लेकिन धीर-धीरे जब आप बाज़ार के स्वभाव को समझकर अपना सिस्टम विकसित कर लेते हो, तब बाहरी टिप्स या सलाह का कोई मतलब नहीं रह जाता। तब उसका महत्व बच्चे से उंगली पकड़वाने जितना रह जाता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

इधर कुछ दिनों से स्मॉल और मिडकैप कंपनियों के शेयरों में जान आ गई लगती है। लेकिन पिछले 13 महीनों में बीएसई स्मॉल-कैप सूचकांक लगभग 35% और मिडकैप सूचकांक 25% लुढ़क चुका है। इस दौरान अच्छी-खासी कंपनियों के शेयरों ने आम निवेशकों को रुला डाला। लेकिन कंपनी अगर अच्छी है तो पछताने के बजाय उसमें खरीद बढ़ा देने में कोई हर्ज नहीं है। समझिए कि यह आपके धैर्य की परीक्षा है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी