जानने के बावजूद बच जाता है अज्ञात
रिस्क लेने की अपनी क्षमता समझ ली तो यह जानना होगा कि शेयर बाज़ार में कितना रिस्क है। कंपनी की बैलेंस शीट, उसका वित्तीय कामकाज, उसका प्रबंधन और उसकी शेयरधारिता के पैटर्न जैसी चीजों को हम पढ़कर थोड़ी मशक्कत से जान सकते हैं। लेकिन कब कौन उसके कितने शेयर खरीदने जा रहा है, अंदरखाने की ऐसी बातें हम नहीं जान सकते। इसके अलावा कुछ चीजें हम घटने से पहले जान ही नहीं सकते। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
रिस्क क्षमता पूंजी की रकम से अलग
शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने का सूत्र मूलतः रिस्क संभालने की कला में निहित है। लेकिन पहले रिस्क की सही-सही समझ ज़रूरी है। शुरुआत इस आकलन से करें कि आपके रिस्क लेने की क्षमता कितनी है। यह पूंजी के पैमाने से भिन्न है। मसलन, आप 1000 रुपए के दस, 100 रुपए के 100, दस रुपए के 1000 शेयर खरीदें तो पूंजी तो 10,000 रुपए ही लगती है, लेकिन रिस्क बढ़ता जाता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
शेयर बाज़ार है धनकुबेरों का अड्डा!
शेयर बाज़ार में निवेश करना बहुत रिस्की है। फिर भी देश में लगभग 4.14 करोड़ लोग फिलहाल यह रिस्क उठा रहे हैं। साथ ही म्यूचुअल फंड में निवेश करनेवालों के खातों की संख्या 8.91 करोड़ पर पहुंच चुकी है। ज़रूरी नहीं कि इन सबके पास ज़रूरत से ऊपर इफरात धन हो। हालांकि शेयर बाज़ार मूलतः उन्हीं लोगों के लिए है जिनका धन इसमें डूब भी जाए तो खास फर्क नहीं पड़ता। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
रिस्क संभालें अगर तो बाज़ी लगे हाथ
शेयरों के भावों के पैटर्न को परखते हुए उनके स्वभाव को भांपना, उनमें से अपने माफिक कंपनियां चुनना, दैनिक व साप्ताहिक चार्ट पर संस्थाओं व प्रोफेशनल ट्रेडरों की डिमांड व सप्लाई के बिंदुओं को जानना, खुद का सिस्टम बनाना और हर वक्त रिस्क को संभालने के अनुशासन का कड़ा पालन। ये पांच सूत्र साध लिए तो ट्रेडिंग में आपकी सफलता की प्रायिकता काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इसमें रिस्क संभालना सबसे खास है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी







