बजट में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए पेंशन का सब्जबाग फेंका गया है। लेकिन यह पेंशन इस समय बूढ़े हो रहे मजदूरों को नहीं, बल्कि अभी 29 साल के उस मजदूर को 60 साल का होने पर मिलेगी, जो प्रतिमाह 100 रुपए अपने पेंशन खाते में डालेगा। 8% सालाना ब्याज पर मजदूर की यह बचत 30 साल में 1.50 लाख रुपए हो जाएगी। इस पर सरकार उसे 3000 रुपए प्रतिमाह पेंशन देगी। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अगर बातों से चुनावी जंग और कस्मे-वादों से दिल जीता जा सकता तो इसमें मोदी सरकार का कोई तोड़ नहीं है। सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सवर्ण गरीबों के लिए 10% आरक्षण घोषित कर दिया। लेकिन इसे लागू करने का कोई इंतज़ाम नहीं किया। बजट में 12 करोड़ छोटी जोतवाले किसानों को सालाना 6000 रुपए देने की घोषणा कर दी। लेकिन इन किसानों की पहचान कैसे की जाएगी, यह तक स्पष्ट नहीं है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

चुनावी साल में पेश किए गए बजट का कोई मतलब नहीं होता। फिर भी एनडीए सरकार ने बजट में किसानों के खातों में 75,000 करोड़ रुपए डालने, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए पेंशन स्कीम और नौकरीपेशा तबके के लिए इनकम टैक्स की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने का ऐलान कर दिया। इन पर अमल मई में बननेवाली सरकार पर निर्भर है। लेकिन शेयर बाज़ार के नजरिए से यह अच्छा बजट है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

नकारात्मक खबर घबराहट पैदा कर दे तो शेयरों के भाव गोता लगा जाते हैं। कुछ महीने पहले यस बैंक के साथ यह हादसा हुआ था। हालांकि अब वह उससे उबरने लगा है। खबरों की ऐसी मार के वक्त अगर यकीन हो कि कंपनी की मूलभूत मजबूती बरकरार है और उसके धंधे का भविष्य संभावनामय है तो उसके डुबकी लगाते शेयर को लपकने का रिस्क लिया जा सकता है। आज तथास्तु में झटका खानेवाली ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी