ट्रेडिंग से नोट बनाना नहीं है आसान
बाज़ार का सच कैसे जानें, यह कठिन-कठोर चुनौती है जिसे हर किसी को अपनी लगन व मेहनत से सुलझाना होता है। नौकरी व बिजनेस में धन कमाना उतना कठिन नहीं है, जितना नोट से नोट बनाना जैसा कि हमें शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में करना होता है। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग बहुत ही ज्यादा रिस्की है। इसमें पुख्ता तैयारी के बिना उतरना आत्मघाती साबित होता है। बाज़ार नौसिखिया लोगों को जमकर पीटता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
शोर को छोड़ सार को पकड़ना ज़रूरी
हमें अगर ट्रेडिंग व निवेश से कमाना है तो सारा ज़ोर यह सीखने-समझने पर लगाना चाहिए कि शेयर बाज़ार कैसे काम करता है और वो अभी कौन-से संकेत फेंक रहा है। इसका अंतिम सूत्र हमें ही निकालना होता है। बिजनेस अखबार, चैनल या इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री में शोर व थोथापन बहुत होता है, जबकि सार न के बराबर क्योंकि आम निवेशकों को सच बताना उनके बिजनेस मॉडल के केंद्र में नहीं है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
सोच से नहीं, हकीकत से चले बाज़ार
आपको क्या लगता है, बड़े-बड़े दिग्गज क्या बोलते हैं या कोई भी क्या महसूस करता है, शेयर बाज़ार इसकी कतई परवाह नहीं करता। इसलिए हमें कभी भी बाज़ार में अपना अगला कदम तय करते वक्त किसी की बात या अपनी भावना के बजाय ज़मीनी हकीकत को समझने की कोशिश करनी चाहिए। बाज़ार के अचानक गिर जाने की चिंता करना एकदम फालतू है। इस चिंता से ट्रेडिंग या निवेश में कोई मदद नहीं मिलती। अब सोम का व्योम…औरऔर भी
भावों के जाल में उलझा है मूल्य
समाज है तो बाज़ार है। बाज़ार है तो हर वस्तु या सेवा का मूल्य है। आमतौर पर बाज़ार में किसी सेवा या वस्तु का मूल्य ठीक उस समय उसकी मांग व सप्लाई के संतुलन को सटीक रूप से दिखलाता है। लेकिन शेयर बाज़ार में असली मूल्य अमूमन वर्तमान भावों में नहीं झलकता क्योंकि वे भविष्य के आकलन और कंपनी को लेकर बनी तात्कालिक धारणा को दर्शाते हैं। तथास्तु में आज ऐसे ही भाव-जाल में फंसी एक कंपनी…औरऔर भी







