शेयर बाज़ार हर पल, ठीक उस पल तक उपलब्ध सारी सूचनाओं को दर्शाता है। लेकिन वो बड़ा टेढ़ा-मेढ़ा आईना है जो सूचनाओं के तर्क व विवेकसंगत प्रभाव को नहीं, बल्कि उन्हें काफी कम या बहुत ज्यादा करके दिखाता है। बाज़ार आमतौर पर बुरी खबरों को ज्यादा ही रोता है, जबकि अच्छी खबरों पर बहुत ज्यादा आशावादी हो जाता है। वह अक्सर किसी पागल या हमारे मन के पागलपन की तरह बर्ताव करता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

आमतौर पर लंबे समय का निवेश बहुत बोरिंग होता है। उसमें अचंभे या थ्रिल जैसी कोई चीज़ नहीं। वहीं, ट्रेडिंग में अचंभा ही अचंभा होता है। वहां पल-पल का थ्रिल है। यही वजह है कि बहुत से लोग नफे-नुकसान की परवाह किए बगैर इस थ्रिल के आदी हो जाते हैं। यह अलग बात है कि आखिरकार सब कुछ लुटाकर ड्रग एडिक्ट की तरह कहीं के नहीं रहते। हमें इस एडिक्शन से बचना चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी