बुद्ध ने करीब ढाई हजार साल पहले विपश्यना की पुरानी पद्धति खोज निकाली थी। इसमें शरीर में पल-पल होती संवेदनाओं को देखते-देखते आप मन के विकारों, खासकर राग व द्वेष से मुक्त होने लगते हो। इसी तरह आप शेयर बाज़ार में पल-पल के भावों को निष्पक्ष भाव से देखने लगें तो लालच व भय की भावना से ऊपर उठकर उनकी सच्चाई से वाकिफ हो जाएंगे और ट्रेडिंग से कमाई का सूत्र पा जाएंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग भले ही सुबह 9.15 से शाम 3.30 बजे तक होती है। लेकिन ग्लोबल हो चुकी दुनिया में सारे वित्तीय बाज़ार एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की हलचलों से प्रभावित होते हैं। एशिया के तमाम बाज़ार हमसे पहले खुलते हैं। उसके बाद यूरोप में ट्रेडिंग शुरू होती है। फिर अमेरिका का बाज़ार सक्रिय हो जाता है। वित्तीय बाज़ार की धड़कन छुट्टियों के अलावा कभी नहीं रुकती। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

वीतराग या वीतद्वेष हो जाने का मतलब जीवन से पलायन नहीं है। इस अवस्था में आप अपने मन के गुलाम नहीं, बल्कि उसके मालिक बन जाते हो। तब आप जीवन आवेश या आवेग में नहीं, नियम-धर्म से जीते हो। प्रकृति के नियमों को समझकर उनके माफिक चलने से आपको जीवन में सुख और सफलता मिलती है। इसी तरह यह अवस्था आपको शेयर बाज़ार के नियमों को समझकर उससे कमाने में मदद करती है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

लालच और भय की भावना शेयर बाज़ार की पल-पल की गति का मुख्य कारक है। अमूमन हर कारोबारी इनके आवेग/आवेश में बहता रहता है। रिटर्न से राग और रिस्क से द्वेष। हर किसी को लाभ की तमन्ना और घाटे से घबराहट होती है। लेकिन जीवन की तरह यहां भी वही बराबर सफल होता है जो राग या द्वेष में समभाव रहता है। वह लाभ या घाटे को एक जैसी तटस्थता से देखता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

कंपनियों के शेयरों के भाव उनके धंधे व मुनाफे के साथ दिशा पकड़ते हैं। लेकिन यह लंबे समय में होता है, जबकि छोटे समय यानी, कुछ दिन या महीनों में शेयरों के भाव उन्हें पकड़ने/छोड़ने की लालसा में लगे लाखों लोगों की लालच व डर की भावना से उछल-कूद मचाते हैं। एक ही वक्त कुछ लोग उनको हर हाल में खरीदने को लालायित रहते हैं, जबकि कुछ लोग बेचने पर उतारू रहते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी