शेयरों के भावों के चार्ट पर डिमांड-सप्लाई के स्तरों के बीच के फासले को ‘प्रॉफिट ज़ोन’ कहते हैं। यह ज़ोन दिखाता है कि उस शेयर को डिमांड के स्तर पर खरीद और सप्लाई के स्तर पर बेचकर कितना फायदा कमाया जा सकता है। डिमांड-सप्लाई के स्तर टेक्निकल एनालिसिस के सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल से भिन्न होते हैं। हालांकि डिमांड और सप्लाई के स्तर चिन्हित करने में आखिरी कैंडल का आकार निर्णायक होता है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में शेयरों का फ्लोटिंग स्टॉक सीमित है। इसलिए भाव डिमांड से सप्लाई और सप्लाई से डिमांड ज़ोन का चक्कर काटते हैं। भाव सीधी रेखा नहीं, बल्कि लहरों में चलते हैं। डिमांड ज़ोन से शुरू खरीद जब तक चलती है, तब तक भाव चढ़ते हैं। वहीं, खरीद के सारे ऑर्डर चुक जाने पर शेयर सप्लाई ज़ोन में पहुंच जाता है। वहां से बिक्री के सारे ऑर्डर चुकने तक शेयर गिरता रहता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार में डिमांड-सप्लाई का असंतुलन बैंक, प्रोफेशनल ट्रेडरों और वित्तीय संस्थाओं की खरीद-फरोख्त से बनता है। ये दिग्गज कब खरीद या बेच रहे हैं, इसे हम किसी शेयर के भावों के चार्ट पर देख सकते हैं। तब हम भी उसी स्तर पर खरीद या बेचकर उनकी तरह ट्रेडिंग से मुनाफा कमा सकते हैं। लेकिन वहां तक हम तभी पहुंच सकते हैं जब शेयर बाज़ार में भावों के उठने-गिरने का मूल नियम समझ लें। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

कच्चे तेल के बढ़ते दाम और कमज़ोर होते रुपए ने देश पर दोहरी मार लगाई है। पांच साल बाद भारत फिर से ब्राज़ील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका व तुर्की के साथ दुनिया की पांच भंगुर अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाने लगा है। यह चिंता की बात है। लेकिन भारतीय विकास गाथा इतनी लंबी है कि ज्यादा परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। आज तथास्तु में ऐसी कंपनी, जिसमें कम से कम दस साल का निवेश बहुत फलदायी साबित होगा…औरऔर भी