ज्ञान पढ़कर पाया जा सकता है। लेकिन कौशल तो केवल अभ्यास से हासिल किया जा सकता है। यह अभ्यास किसी गुरु की देखरेख में हो तो सबसे अच्छा है। लेकिन ज़माने के सारे गुरु जब स्वार्थों से बंधे हों, तब कौशल में पारंगत होने के लिए एकलव्य ही बनना पड़ता है। नियम और अनुशासन गुरु का काम करते हैं, जबकि उनका पालन करते हुए निरंतर अभ्यास से हम हुनरमंद बनते चले जाते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

दुनिया के सफलतम निवेशक वॉरेन बफेट का यह कहना शेयर बाज़ार का नीति-वाक्य बन चुका है कि जब सभी डर कर बेच रहे हों, तब लालची बन खरीद लेना चाहिए और सभी लालच में फंसे हों, तब बेचकर निकल लेना चाहिए। ऐसा सटीक मौका कभी-कभार ही मिलता है। लेकिन अपने यहां बीते हफ्ते घबराहट में चली बिकवाली ने लालची बनने के कुछ ऐसे ही मौके पेश कर दिए हैं। आज तथास्तु में उन्हीं में से एक मौका…औरऔर भी

दुनिया-जहान के किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए दो चीज़ें ज़रूरी होती हैं। पहली है ज्ञान और दूसरी है कौशल या हुनर। यह बात वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग पर भी लागू होती है। इनमें से किसी एक चीज़ का होना और दूसरी का न होना ऐसा अधूरापन है जो मंज़िल तक नहीं पहुंचा सकता। विषय की जानकारी और उससे संबंधित ज्ञान बुनियाद है। लेकिन सफलता की इमारत केवल बुनियाद से नहीं बनती। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बिजनेस चैनल और ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यम बहुत सारी जानकारियां व आंकड़े फेंकते रहते हैं। मान भी लें कि इस डेटा से ज्ञान बढ़ता है, तब भी सच्चाई यही है कि वित्तीय बाज़ार में सफलता पाने के लिए जो चीज़ें चाहिए, ज्ञान उसका महज एक हिस्सा है। क्लच, गियर, ब्रेक व स्टीयरिंग का ज्ञान पढ़कर आप ड्राइवर नहीं बन जाते और न ही सर्जरी की किताबें पढ़कर आप कुशल सर्जन बन सकते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी