हमारा अवचेतन मन ही मूलतः हमारे विचारों, भावनाओं व बर्ताव का फैसला करता है। यकीनन इसमें चेतन मन का भी योगदान होता है। लेकिन चेतन मन का मुख्य काम किसी रथ के सारथी या कार के ड्राइवर जैसा है। वो अवचेतन मन को जितना बेहतर ट्रेनिंग देगा, उसे जितना रवां रखेगा, उसके विचार, भावना व बर्ताव उतने ही ज्यादा सच या यथार्थ पर आधारित होंगे और वह उतने ही अच्छे नतीजे हासिल करेगा। अब सोम का व्योम…औरऔर भी