धीरे-धीरे पुरानी मान्यताएं पीछे हटती जाती हैं और उनकी जगह ट्रेडिंग का वस्तुपरक नज़रिया लेने लगता है। हमें कभी-कभी आंखें बंदकर इस नए नज़रिए को आकार लेते महसूस करना चाहिए। पुराने के जाने और नए के आने को अनुभूति पर कसना चाहिए। इस तरह हम अपने अवचेतन मन को ट्रेन करते जाते हैं। याद रखें कि अवचेतन मन हमारी 95% क्रियाओं व सोच को कंट्रोल करता है, जबकि चेतन मन मात्र 5% को। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी