मानस ही हमें बराबर हराता रहता है
2018-06-29
बचपन से बनती मान्यताओं व धारणाओं से हमारी आंतरिक मनोवैज्ञानिक संरचना तैयार होती है। वही हमारे हर व्यवहार को नियंत्रित करती है। मन में गांठ है कि कभी हारना नहीं है तो ट्रेडर पहले से तय स्टॉप-लॉस खिसका जाता है। उसका रिस्क बढ़ता जाता है। फिर भी हार मानना उसे गवारा नहीं क्योंकि ऐसा करने से वो गलत साबित हो जाएगा। लेकिन हमेशा जीतने की मान्यता अंततः उसे घाटे में डुबा डालती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

