पढ़ाई-लिखाई नहीं खोल पाती है गांठ
2018-06-26
पांच-छह साल की उम्र तक हमारे आग्रह या मान्यताएं आकार लेना शुरू हो जाती हैं। वे सामाजिक परिवेश से निकलती हैं और उन्हीं को पुष्ट करती हैं। होना तो यह चाहिए था कि शिक्षा व्यवस्था उन्हें हर पल चुनौती देती और सोचने की वैज्ञानिक, तर्कसंगत व वस्तुगत पद्धति विकसित करती। लेकिन अंग्रेज़ों ने भारतीयों की सृजन क्षमता को कुंद करने के लिए जो शिक्षा प्रणाली शुरू की, वही कमोबेश अब भी जारी है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

