बैंक, संस्थाएं या प्रोफेशनल ट्रेडर रिटेल ट्रेडरों की तरह सारे शेयर एकमुश्त नहीं खरीदते। वे धीरे-धीरे कुछ दिनों में पोजिशन बनाते हैं। साथ ही वे सौदा एक नहीं, बल्कि कई ब्रोकरों के ज़रिए करते हैं। एक बार उनको वांछित मात्रा में शेयर मिल जाते हैं, फिर वे फेटना शुरू कर देते हैं। लेकिन इंट्रा-डे कतई नहीं। बैंकों की न्यूनतम होल्डिंग अवधि ट्रेडिंग वाले दिन को छोड़कर दो दिन, यानी टी+2 की होती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी