हम कितना भी ज्ञान हासिल कर लें, अपनी नज़र बहुत-बहुत व्यापक बना लें, लेकिन संपूर्ण सच हमारी पकड़ से हमेशा बाहर ही छिटक जाता है। शेयर बाज़ार पर यह नियम कुछ ज्यादा ही लागू होता है क्योंकि वह तर्कों से ज्यादा लाखों लोगों की लालच व डर जैसी स्थूल भावनाओं से नियंत्रित होता है। इन लोगों में अब दुनिया के ग्लोबल हो जाने के बाद विदेशी भी शामिल हो गए हैं। अब देखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी