अर्थशास्त्र के महाज्ञानी, नोबेल पुरस्कार विजेता तक कह चुके हैं कि छोटी अवधि में शेयरों के भावों की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। दूसरे शब्दों में शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग मूलतः अटकलबाज़ी या कयासबाज़ी पर ही आधारित है। हालांकि बाज़ार के मनोविज्ञान और भावों के पिछले पैटर्न से नई खरीद या बिक्री का अनुमान लगाया जाता है। लेकिन वह भी होता तो अनुमान ही है। इसलिए यहां स्टॉप लॉस न लगाना आत्मघाती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी