कुछ दिनों पहले एक दुर्जन का फोन आया। बोले कि उनकी रिसर्च फर्म कैश व फ्यूचर्स में इंट्रा-डे टिप्स देती है। रोज़ एक पक्की सलाह। मैंने पूछा कि स्टॉक सेलेक्शन का उनका सिस्टम क्या है। लगे आंय-बांय बकने। लेकिन दावा कि उनकी दस में से आठ टिप्स सटीक बैठती है। फीस 11,000 रुपए प्रति माह। ऐसे ठगों से सावधान रहें। कमाना है तो ऐसा सिस्टम बनाइए कि लोग आपके बाद खरीदें या बेचें। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

रिटेल ट्रेडरों को अगर बाज़ार से कमाना है तो उन्हें सच्चाई को जस का तस समझने की कोशिश करनी होगी और अपनी सीमाओं को स्वीकार करना होगा। मन का फंदा तोड़कर उसके ऊपर बुद्धि को मांजकर रखना होगा। कोई कितना भी झांसा दे, हमें कम मेहनत में ज्यादा कमाई के लालच में नहीं फंसना है क्योंकि हमें लालच में फंसानेवाले दरअसल अपनी आसान कमाई का इंतज़ाम करने में लगे होते हैं। अब चलाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

सीधी-सी बात है कि ग्लोबल नेटवर्क से जुड़ी पूंजी या उसके साथ लयताल मिलाकर चले रहे लोकल ऑपरेटरों के प्रोफेशनल अंदाज़ को टक्कर देना रिटेल ट्रेडरों के वश की बात नहीं है। रिटेल ट्रेडर उनका अनुसरण ही कर सकते हैं। लेकिन टुच्चे अहंकारवश रिटेल ट्रेडरों को यह सच्चाई हजम नहीं होती। नतीजा यह होता है कि उनकी सारी पूंजी धीरे-धीरे बहकर प्रोफेशनल व संस्थागत ट्रेडरों के बैंक खातों में पहुंच जाती है। अब परखें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं कितनी ग्लोबल हुई हैं, इसका तो पता नहीं। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि दुनिया के वित्तीय बाज़ार एकदम ग्लोबल हो गए हैं। किसी भी अंतरराष्ट्रीय घटना से बड़े से लेकर छोटे बाज़ार तक एक साथ हिल जाते हैं। ग्लोबल नेटवर्क के साथ चलती पूंजी के सामने लोकल दिग्गज़ बौने साबित हो जाते हैं। ऐसे में वित्तीय बाजार की समझ और अपना हुनर ही अंततः काम आता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी