बात साफ बड़ी साफ है कि वित्तीय बाज़ार में कमाई शुद्ध रूप से साफ समझ और अनुशासन का खेल है। हर सौदे का रिस्क व रिवॉर्ड का अनुपात समझा और मुनाफे को अधिकतम व घाटे को न्यूनतम रखने का अनुशासन माना तो दिल-दिमाग के साथ आपका बैंकखाता भी सुरक्षित रहेगा। लेकिन बुद्धि को छोड़ मन या इन्ट्यूशन पर चले तो कभी भी किनारा नहीं मिलेगा। आपको अपनी ट्रेडिंग पूंजी हमेशा बचाकर चलनी है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

महीनेभर में बीस दिन ट्रेडिंग की। सौदे वैसे चुने जिसमें गिरने की आशंका एक और बढ़ने की संभावना दो हो। रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात 1:2 का। मान लें कि बीस में से 60% यानी बारह सौदे गलत हों और आपने स्टॉप-लॉस 2% लगाया हो तो कुल नुकसान हुआ 12×2 यानी 24% का। लेकिन बाकी आठ सौदों में फायदा होगा 8×4 यानी 32% का। इस तरह बहुत खराब स्थिति में भी महीने भर में 8% कमाई। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में बड़ा रिस्क है। लेकिन ट्रेडिंग की सलाह देनेवालों के लिए यह बड़ा सुरक्षित पेशा है। आप इस बात को अच्छी तरह समझ लें। उन्होंने तो चैनल से लेकर वेबसाइट या अखबार में सलाह फेंकी, नोट पकड़े और किनारे हो लिए। लेकिन उस सलाह पर डूबने या उठनेवाली पूंजी आपकी है। बच्चे से भी परची उठवा लें तो प्रायिकता 50-50% रहेगी। नीति बनाइए कि 50-50% में भी लाभ कमाएंगे। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बंधे-बंधाए ढर्रे पर चलनेवाले भविष्य को लेकर निश्चिंत हो सकते हैं क्योंकि लगभग तय होता है कि आगे क्या होगा। मगर, लीक छोड़कर चलनेवाले हमेशा ऐसी धार पर खड़े होते हैं जहां पक्का पता नहीं होता कि कल क्या होगा। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग भी इसी तरह लीक से हटकर चलने का दुस्साहस है। यहां कुछ भी पक्का नहीं। इसलिए यहां हमेशा प्रायिकता की गणना करके चलें। सही तो क्या, गलत तो क्या? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार का निवेश कोई सोना नहीं कि लेकर रख लिया जो मुसीबत में काम आएगा। शेयरों में हम निवेश रिटर्न के लिए करते हैं। जिस भाव पर उसे खरीदते हैं, वो उसकी कीमत और जो मिलता है वो उसका मूल्य। 100 का मूल्य अगर 80 के भाव पर खरीदेंगे तो 25% रिटर्न और 87 में खरीदें तो रिटर्न हुआ 15% से नीचे। इसलिए सही भाव पर निवेश करना ज़रूरी है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी