याद रखें कि आज तक ट्रेडिंग का ऐसा कोई तरीका नहीं निकाला गया है जो 100% कामयाबी की गारंटी दे सके। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग प्रायिकता का खेल है। इसलिए यहां हमेशा घाटे को न्यूनतम रखने के लिए स्टॉप-लॉस व पोजिशन साइजिंग जैसे तरीके अपनाए जाते हैं। इधर, हमारे सीखते जाने का सिलसिला जारी है। हाल ही में आरएसआई के 20% से नीचे चले जाने और ओपन इंटरेस्ट का नया तरीका सीखा है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

हम आपके लिए जो भी स्टॉक चुनते हैं, उसके मूल में रहता है कि किसी स्टॉक में संस्थागत ट्रेडर कहां पर एंट्री और एक्जिट ले सकते हैं। इसके लिए हम मुख्य रूप से कैंडल के आकार, स्थान, मूविंग औसत और आरएसआई जैसे गिने-चुने इंडीकेटरों का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही भावों की चाल को चार्ट पर अलग-अलग टाइमफ्रेम में देखते हैं। चार्टिंग का सॉफ्टवेयर हम बीएसई व एनएसई का ही इस्तेमाल करते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

हम ऋण लेते हैं तो वह हमारे लिए बोझ या देनदारी होता है। मशहूर कहावत भी है कि अगर हमें बैंक को 100 रुपए लौटाने हैं तो यह हमारी समस्या है, लेकिन हमें अगर 100 करोड़ लौटाने हैं तो यह बैंक की समस्या है। दरअसल, बैंक जब ऋण देता है, तब वह उसके लिए आस्ति होती है क्योंकि मूलधन समेत उस पर मिला ब्याज़ ही उसकी कमाई का मुख्य ज़रिया है। इन ऋणों की वापसी अटक जाएऔरऔर भी

पिछले पौने चार साल में बहुतों ने यह सेवा ली, बहुत-से बाद में पीछे हट गए और बहुत-से अब भी मैदान में डटे हैं। जो डटे हैं, वे यकीनन ऐसे लोग हैं जिन्होंने ट्रेडिंग का अपना सिस्टम बनाया होगा। गांठ बांध लें कि अपना सिस्टम बनाए बिना आप सटीक सलाहों से भी बराबर नहीं कमा पाएंगे। हम आपकी रिसर्च का बोझ हल्का करते हैं ताकि आप न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न कमा सकें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी