शेयर बाज़ार में वही ट्रेडर बराबर मुनाफा कमाते हैं जो किसी स्टॉक में मांग व सप्लाई के असंतुलन को सही ढंग से पकड़ पाते हैं। यह असंतुलन हमारे-आप जैसे रिटेल ट्रेडरों की खरीद-बिक्री से नहीं, बल्कि बैंक, वित्तीय संस्थाओं व हाई नेटवर्थ व्यक्तियों की चाल से बनता है। उस्ताद ट्रेडर इसके लिए टेक्निकल एनालिसिस से इतर तरीके अपनाते हैं। वे उस स्टॉक के फ्यूचर्स के बदलते ओपन इंटरेस्ट पर भी ध्यान देते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अन्य बाज़ारों की तरह शेयर बाजार में भी मांग व सप्लाई का संतुलन बनता-बिगड़ता रहता है। आप कहेंगे कि हर कंपनी के जारी शेयरों की संख्या बंधी रहती है। प्रमोटर के हिस्से को हटाकर कंपनी का फ्लोटिंग स्टॉक भी बंधा रहता है। ऐसे में नई मांग आ सकती है। लेकिन नई सप्लाई कहां से आएगी। असल में बाज़ार में लगाकर भूल जानेवाले निवेशक काफी कम हैं। बाकी ज्यादातर निकालते व लगाते रहते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार में चीजों के दाम चलते, बढ़ते व गिरते क्यों रहते हैं? वे एक जगह चिपककर क्यों नहीं रहते? ऐसा इसलिए क्योंकि बाज़ार में उस चीज़ की मांग व सप्लाई में बराबर असंतुलन बना रहता है। संतुलन तक पहुंचते-पहुंचते फिर नया असंतुलन बन जाता है और भाव चल निकलते हैं। पुराने समय में भाप से चलनेवाले रेल इंजिनों के पहियों पर एक तरफ धातु का वक्र टुकड़ा लगाकर असंतुलन पैदा किया जाता था। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वैसे तो शेयर बाजार की ट्रेडिंग कच्चे दिलवालों या नौसिखिया लोगों के लिए नहीं है क्योंकि इसमें ऐसे घाघ व मंजे हुए खिलाड़ी घात लगाए बैठे हैं जो बेपरवाह व ‘नए मुल्लों’ को चुटकी में हज़म कर जाते हैं। इसलिए नए लोगों को अक्सर हमारी सलाह यही रहती है कि पहले आप साल-दो साल के निवेश को आजमाकर देखें। फिर भी ट्रेडिंग करनी है तो इसमें इफरात पूंजी का केवल 5% हिस्सा लगाएं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

कहते हैं कि लंबे समय का निवेश फलदायी होता है। यह भी मानते हैं कि स्मॉल-कैप कंपनियां कई गुना रिटर्न देती हैं। पर, बीएसई स्मॉल-कैप सूचकांक 31 दिसंबर 2007 से 3 मार्च 2017 के बीच 13,348.37 से महज 2.03% बढ़कर 13,620.17 पर पहुंचा है। यानी, इस सूचकांक में दस साल पहले लगाए गए आपके 100 रुपए अभी तक मात्र 102 रुपए हुए होते। इसलिए मिथकों में फंसकर निवेश सफल नहीं होता। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी