निवेशक गए, अब ज़माना है ट्रेडर का
2017-03-08
अन्य बाज़ारों की तरह शेयर बाजार में भी मांग व सप्लाई का संतुलन बनता-बिगड़ता रहता है। आप कहेंगे कि हर कंपनी के जारी शेयरों की संख्या बंधी रहती है। प्रमोटर के हिस्से को हटाकर कंपनी का फ्लोटिंग स्टॉक भी बंधा रहता है। ऐसे में नई मांग आ सकती है। लेकिन नई सप्लाई कहां से आएगी। असल में बाज़ार में लगाकर भूल जानेवाले निवेशक काफी कम हैं। बाकी ज्यादातर निकालते व लगाते रहते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

