नतीजे निर्जीव, जान डालते हैं ट्रेडर
कंपनियों के सालाना नतीजों का मौसम है। अधिकांश लोग मानते हैं कि नतीजे अच्छे होंगे तो शेयर चढ़ेंगे और खराब होंगे तो गिरेंगे। लेकिन अक्सर बाज़ार में ऐसा होता नहीं। खराब नतीजों पर भी कंपनी के शेयर उछल जाते हैं और अच्छे नतीजों पर भी लुढ़क जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि शेयरों के भाव नतीजों या खबरों पर नहीं, बल्कि उन पर ट्रेडर क्या प्रतिक्रिया दिखाते हैं, इससे तय होते हैं। अब देखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी
घी, सोना, सेंसेक्स और दौलत
दस साल पहले घी का दाम 120 रुपए/किलो, सोने का दाम 8500 रुपए/दस ग्राम और सेंसेक्स 12,000 अंक पर था। इस समय घी 450 रुपए, सोना 30,000 रुपए और सेंसेक्स 25,225 पर है। इस तरह इन दस सालों में घी 275%, सोना 253% और सेंसेक्स 113% बढ़ा है। सेंसेक्स का इन तीनों में सबसे कम बढ़ना दिखाता है कि अर्थव्यवस्था में दौलत का सृजन नहीं हो रहा है। तथास्तु में आज की कंपनी दौलत बनाने के लिए…औरऔर भी
अपने को पीछे रख चलाएं बाज़ार की
निवेश या ट्रेडिंग के लिए कंपनी चुनना बहुत मुश्किल नहीं। रिस्क संभालने की कला सीखना भी कोई खास मुश्किल नहीं। लेकिन इसके लिए हमें अपनी सामान्य सोच व आदतों पर अंकुश लगाना पड़ता है। शेयर बाज़ार में रिस्क संभालने का मोटे तौर पर मतलब है ज्यादा गिरावट से बचना। अगर हम मूविंग औसत व टाइम फ्रेम को ध्यान में रखने लगें और बाज़ार की चलाएं तो अधिक चोट खाने से बच सकते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
बंधे सब मूलधन बचाने की फांस में
बचत को अलग-अलग आस्तियों में लगाने को पोर्टफोलियो प्रबंधन भी कहा जाता है। आम लोग ज्यादातर निवेश बैंक एफडी, सोने या रियल एस्टेट में करते हैं। बाकी आस्तियों में निवेश इसलिए नहीं करते क्योंकि वहां मूलधन ही डूबने का रिस्क होता है। लेकिन लंबे समय में सबसे ज्यादा रिटर्न शेयरों में निवेश से मिलता है। ट्रेडिंग में भी हलचल अधिक होने से कमा सकते हैं। मगर, इसके लिए रिस्क संभालना मूल शर्त है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी






