आज ज़माना बिग डेटा का है। हर दिन बाज़ार में जितना ज्यादा डेटा आता है, उसका खाली बुद्धि से विश्लेषण करना तेज़ से तेज़ दिमाग वाले इंसान के लिए भी मुमकिन नहीं। इसलिए हमें मशीन या कंप्यूटर का सहारा लेना ही पड़ेगा। वैसे भी अगर आपके पास कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन नहीं है तो आप गुजरे ज़माने में रह रहे हैं और आपको वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

सॉफ्टवेयर पहले जो-जो हुआ है, उसे नियम में बांधकर एक ढर्रा निकाल सकता है। लेकिन ढर्रे में छिपा ट्रेंड नहीं पकड़ सकता है। वहीं, इंसान लगातार अपनी बुद्धि को माजता और दूसरों को हराने की रणनीति को परिष्कृत करता रहता है। इसीलिए सारे इंडीकेटरों के असर को मिलाकर की गई अल्गोरिदम ट्रेडिंग भी अक्सर हकीकत में घाटे का सबब बन जाती है। वैसे भी गर्दन पीछे मोड़कर आगे की राह सही नहीं दिखती। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

इस समय भारत के शेयर बाज़ार में लगभग एक-तिहाई ट्रेडिंग अल्गोरिदम या नियमों से बंधे कंप्यूटर प्रोग्राम से हो रही है। अमेरिका में यह अनुपात 85% से ज्यादा है। भारत में भी आज नहीं तो कल यही हाल होना है। लेकिन क्या मशीन से होनेवाली ट्रेडिंग अंततः इंसान को मात दे सकती है? अगर आपको इसका जवाब ‘हां’ लगता है तो आप गलत हैं क्योंकि मशीन इंसान के स्वभाव को नहीं समझ सकती। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

जो कंपनियां विदेशी बाज़ार पर निर्भर हैं, उनके लिए देश का सूखा खास मायने नहीं रखता। मगर, जो कंपनियां घरेलू बाज़ार पर निर्भर हैं, उनके लिए मानसून का खराब रहना बहुत मायने रखता है। गांवों और खेती-किसानी की हालत खराब होने से बिक्री से लेकर उनके मुनाफे तक को चोट लगती है। लेकिन आशा है कि दो साल बाद इस बार मानसून औसत से बेहतर रहेगा। तथास्तु में आज ऐसी कंपनी, मानसून जिसे गर्दिश से निकाल देगा…औरऔर भी