जब तक दिखे नहीं, तभी तक अदृश्य
2016-03-08
समाज में जो कुछ घटता है, उनके पीछे कोई न कोई इंसान या इंसानों का समूह हुआ करता है। चूंकि हमारे देखने-सोचने की सीमा है, इसलिए झंझट में न पड़कर हम घटनाओं को अक्सर अदृश्य शक्तियों का प्रताप मान लेते हैं। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में भी यही होता है। जब तक अदृश्य ताकतों का प्रभाव मानकर किस्मत से खेलते हैं, तब तक हारते हैं। वहीं, असलियत समझने के बाद जीतने लगते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

