वित्तीय बाज़ार में जो कुछ होता है, वो इंसान करते हैं, कोई भूत-भगवान या ग्रह-नक्षत्र नहीं। अल्गो ट्रेडिंग की प्रोग्रामिंग भी इंसान ही करते हैं। इन इंसानों की संख्या लाखों में हैं। बाज़ार के ग्लोबल हो जाने के बाद इनमें दक्ष लोग भी भरपूर हैं। अगर कोई इन सबकी भावनाएं भांप सके तो वो भावों का सटीक पूर्वानुमान लगा सकता है। लेकिन ऐसा संभव नहीं तो पिछले पैटर्न से काम निकालना पड़ता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी