एनालिस्टों का कौआरोर जारी है कि अभी बाज़ार जितना गिर चुका है, वहां दीर्घकालिक निवेश का अच्छा मौका है। लेकिन बताते नहीं कि जंगल में आखिर किसी पेड़ को पकड़ें क्योंकि जंगल तो अमूर्त है। फिर सवाल उठता है कि क्या हर गिरा हुआ शेयर निवेश के काबिल है? याद रखें, हर सस्ता शेयर अच्छा नहीं होता। मुमिकन है कि कोई शेयर गिरने के बावजूद औकात से ज्यादा बमक रहा हो। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

हाल-फिलहाल दो बार ऐसा हुआ जब बाज़ार तेज़ी से उठा तो लगा कि गिरावट का अंत हो गया। मगर अगले ही दिन यह आशा टूट गई। सवाल उठता है कि गिरावट का यह दौर कब तक चलेगा? सच है कि मोदी सरकार से तमाम अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं, कंपनियों के नतीजे खराब हैं, मानसून भी खराब रहनेवाला है। लेकिन यह सारी नकारात्मकता तो बाज़ार जज्ब कर चुका है! भरोसा रखें। मौसम है, बदलेगा। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

पुरानी कहावत है कि सब धान बाइस पसेरी नहीं होते। इसी तरह हर शेयर का अपना अलग स्वभाव होता है। उनकी चाल में भिन्नता होती है। वे अलग-अलग किस्म के ट्रेडरों या ऑपरेटरों को खींचते हैं। इसलिए हर किसी पर सामान्य नियम नहीं लागू होते। हमें ट्रेडिंग के लिए स्टॉक्स को चुनते वक्त उनके अलग स्वभाव और पैटर्न को समझना होता है। फिर अपने स्वभाव के हिसाब से उनकी लिस्ट बनानी होती है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

कितने भी रिटेल ट्रेडरों से मिल लीजिए, कुछ महीने या साल भर सभी बम-बम करते मिल जाएंगे। लेकिन फिर ऐसा विलाप करते हैं कि मत पूछिए। घाटे में किसी की भी हालत ऐसी हो जाती है। वे कभी शांति से नहीं सोचते कि उनकी ऐसी दुर्दशा क्यों हुई। बजाय इसके वे दोबारा रातोंरात अमीर बनने के किसी धंधे को आजमाने निकल पड़ते हैं। ध्यान रखें कि प्रायिकता के खेल में निश्चितता नहीं होती। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

जिस वित्तीय बाज़ार में भाव एकाध नहीं, अनेकानेक कारणों से प्रभावित होते हैं, जहां भाव मुठ्ठीभर नहीं, बल्कि लाखों लोगों में बसी लालच व डर की भावना से तय होते हों, वहां भविष्य के भावों की गणना यकीनन हम-आप कर सकते हैं, लेकिन हमेशा उनका सटीक निकलना संभव नहीं। कुछ सौदे उल्टे पड़ सकते हैं। हम अधिक से अधिक इतना कर सकते हैं कि सौदे उल्टे पड़ें तो मार कम से कम लगे। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी