वित्तीय बाज़ार हमेशा चक्रों में चलते हैं। तभी उसमें धन का प्रवाह बराबर बना रहता है। खबरें इस प्रवाह को चलाते रहने का बहाना हैं। फिर, अब तो दुनिया इतनी बड़ी हो गई है, ग्लोबल हो चुकी है कि अच्छी-बुरी खबरों का कोई टोटा नहीं रहता। उतार-चढ़ाव का चक्र न रहे तो ट्रेडिंग का धंधा ही बैठ जाएगा, बाज़ार में लिक्विडिटी या तरलता सूख जाएगी। यह बुनियादी सच समझना ज़रूरी है। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी