चीज़ हो काम की तो दाम बढ़ते ही हैं
इंसान की न इच्छाओं का अंत है और न ज़रूरतों का। इसीलिए इन्हें पूरा करने में लगी नई-नई कंपनियों के आने का भी कोई अंत नहीं। जो व्यापक लोगों की ज़रूरत को जितना बेहतर पूरा करती है, वो उतनी ही सफल कंपनी बन जाती है। उपयोगी चीज़ बनाती है, जीवन में मूल्य जोड़ती है तो लोग भी उसे दाम देकर बढ़ाते जाते हैं। नतीज़तन उसके स्वामित्व/शेयर का मूल्य बढता जाता है। तथास्तु में ऐसी ही मूल्य-युक्त कंपनी…औरऔर भी
तेज़ नहीं, हमें चाहिए वाजिब सूचनाएं
शेयरों में ट्रेडिंग और निवेश में सफलता इससे नहीं मिलती कि कितनी तेज़ सूचनाएं आप तक पहुंचती हैं या आपने कितनी पोथियां बांच रखी हैं। यहां सफलता इस बात से तय होती है कि वाजिब सूचनाएं और शिक्षा आप तक पहुंची है या नहीं। मेरे एक मित्र हैं। कुछ दिनों पहले तक फेसबुक पर निवेश व ट्रेडिंग की सलाहें खटाखट मुफ्त में दिया करते थे। लेकिन फालतू-निरर्थक निकला तो एकाउंट बंद कर दिया। अब शुक्रवार की ट्रेडिंग…औरऔर भी
लालची व अधीर निपटते हैं फटाफट
फाइनेंस बाज़ार में बुल्स और बियर्स की तरह कई जानवरों के नाम चलते हैं। इनमें से एक है हॉग्स/पिग्स या हिंदी में बोलें तो सुअर। इसका अभिप्राय उन निवेशकों/ट्रेडरों से होता है जो बेहद लालची व अधीर होते हैं, ब्रोकर या वेबसाइट की ‘हॉट’ टिप पर बल्लियों उछलते हैं और रिसर्च करना या जानकारी जुटाना क्लेश समझते हैं। सुअर भले ही मुश्किल से मरे, लेकिन ‘पिग्स’ निवेशक आसानी से कुर्बान हो जाते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
न जानो तो जटिल, अन्यथा आसान
लोग अक्सर सोचते हैं क्योंकि कम लोग ही ट्रेडिंग में कामयाब होते हैं इसलिए इससे पैसे कमाने की कोई बहुत ही जटिल प्रक्रिया होती होगी। तमाम दुस्साहसी लोग खुद आजमाने और जमकर घाटा खाने के बाद यह राय बनाते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि हम समझ जाएं तो ट्रेडिंग एकदम सीधी-सरल चीज है। उलझने के लिए बहुत सारे जाल ज़रूर है। पर भाव ही सारा रहस्य खोलकर बहुत कुछ कह जाता है। अब मंगल की विजय…औरऔर भी






