मेहनत से ट्रेडिंग सिस्टम बनाया। महीनों तक बगैर धन लगाए उसको टेस्ट भी कर डाला। पर वास्तविक ट्रेडिंग शुरू की तो लगा घाटे पर घाटा। आखिर कोई कितना सहे। भावना में बहकर तय किया कि इस ट्रेडिंग सिस्टम का बेड़ा गरक हो। भटकने लगे मृग मरीचिका में, पर प्यास न बुझी। जानकार कहते हैं कि हमें मशीन बनना पड़ता है क्योंकि ट्रेडिंग सिस्टम दो-दो महीने घाटा देने के बाद असली रंग दिखाते हैं। अब सुध बुधवार की…औरऔर भी