हम हिंदुस्तानियों जैसा उद्यमी सारी दुनिया में शायद ही कहीं मिले। हम हर चीज़ में असली काम का जुगाड़ निकाल लेते हैं। शायद आप जानते ही होंगे कि पंजाब के ढाबों और बड़े घरों में वॉशिंग मशीन से लस्सी बनाई जाती है। कुछ यही हाल शेयर बाज़ार में ऑप्शंस/फ्यूचर्स ट्रेडिंग का है। महज 12वीं पास, गणित में कमज़ोर, अंग्रेज़ी में तंग। फिर भी ज़नाब कॉल और पुट में सिद्धहस्त हैं। करते नमन इसका, बढ़ें शुक्रवार की ओर…औरऔर भी

ट्रेडिंग में कोई एक रणनीति हर वक्त काम नहीं करती। जनवरी में स्ट़ॉक चुनने से लेकर ट्रेडिंग का जो तरीका था, वह चार महीने बाद मई तक आते-आते बदल गया। अब मोदी सरकार का पहला आम बजट आने में महज एक हफ्ता बचा है तो इन दिनों की ट्रेडिंग रणनीति अलग होगी। बदलते हालात में जो स्थाई चीज़ है, वो है लचीलापन। हमारी ट्रेडिंग मानसिकता का जरूरी तत्व होना चाहिए लचीलापन। अब करें शुरू गुरु का अभ्यास…औरऔर भी

हम सभी व्यक्तिगत ट्रेडर हैं। शेयर बाज़ार के घराती नहीं, बराती हैं। हम खुद कुछ नहीं बनाते। दूसरों के बनाए पर खेलते हैं। इन दूसरों में 9275 ब्रोकर, 51707 सब ब्रोकर, 1709 विदेशी संस्थागत निवेशक व उनके 6391 सब एकाउंट, 50 म्यूचुअल फंड, 207 वेंचर कैपिटल फंड और बीसियों बैंकों के साथ हज़ारों प्रोफेशनल ट्रेडर व एचएनआई शामिल हैं। इन सभी की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए ही हमें ट्रेडिंग करनी चाहिए। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

बाजार में एक उन्माद-सा छाया हुआ है। लोग खरीदने का फैसला कर चुके हैं। बस, वजह की तलाश है। सेंसेक्स साल के पहले छह महीने में 20.21% बढ़ गया, जबकि इस दौरान अमेरिका का बाज़ार 6.1% और जर्मनी का बाज़ार 2.8% ही बढ़ा है। विदेशी निवेशक भारत में 1000 करोड़ डॉलर से ज्यादा झोंक चुके हैं। बीएसई-500 के करीब 100 मिड व स्मॉलकैप स्टॉक्स पिछले छह महीने में दोगुने हो चुके हैं। ऐसे में बढ़ें ज़रा संभलकर…औरऔर भी