ट्रेडरों का सब्र टूटा, चली मुनाफावसूली
शेयर बाज़ार भले ही लंबे समय में कंपनियों के फंडामेंटल और निवेशकों के रवैये से चलता हो। लेकिन छोटे समय में वो ट्रेडरों के रुख और मानसिकता से चलता है। जिन लोगों ने पिछले तीन महीनों में बाज़ार को करीब 16.5% चढ़ाया था, उनके सब्र का बांध अब टूटने लगा है और वे मुनाफावसूली करने लगे हैं। इनमें से बहुतेरे ट्रेडर तो प्रति माह 1.5-2% ब्याज पर धन उठाकर लगाते हैं। मुनाफावसूली के माहौल में अगली रणनीति…औरऔर भी
जेटली जनाब रिलायंस पर मेहरबान!
बजट के आसपास भांति-भांति की चर्चाएं चल निकलती हैं। ऐसी ही एक चर्चा है कि मोदी सरकार मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज़ पर खास मेहरबान हो सकती है। पीटीए पर एंटी डपिंग ड्यूटी लग सकती है। पॉलिमर पर एक्साइज ड्यूटी घट सकती है और कच्चे तेल के आयात पर सेस लगाया जा सकता है। प्राकृतिक गैस उत्पादन व रिफाइनरी पर टैक्स छूट की मीयाद बढ़ाई जा सकती है। इनको कतई न दें तवज्जो। अब नज़र बाज़ार पर…औरऔर भी
भावों की भाषा हमारा एकमात्र औज़ार
हम राकेश झुनझुनवाला या एफआईआई नहीं जो अपनी खरीद से किसी शेयर को चढ़ा दें। न ही हम बैंकर, ब्रोकर या कंपनी प्रवर्तक हैं कि अंदर की खबरें घोषित होने से पहले हमारे पास पहुंच जाएं। हमारी सीमा है कि भावों की भाषा ही ट्रेडिंग का हमारा एकमात्र औजार है। इसे पढ़ने में माहिर हो जाएं और प्रायिकता के मद्देनज़र रिस्क-रिटर्न का सामंजस्य बैठा लें तो जीत हमारी। अन्यथा हारना हमारी नियति है। अब हफ्ता बजट का…औरऔर भी
अंतर्निहित मूल्य है मूल, बाकी बोनस
दीर्घकालिक निवेश में देखते हैं कि कंपनी के भावी कैश-फ्लो के आधार पर उसके शेयर का अंतर्निहित मूल्य कितना है। अगर बाज़ार भाव उससे कम तो निवेश बनता है। नहीं तो उससे दूर रहना भला। दिक्कत यह है कि ज्यादातर शेयर अभी अंतर्निहित मूल्य से काफी ऊपर चल रहे हैं। जब सस्ते थे तो हमारे बताने के बावजूद किसी ने पूछा नहीं। अब सब दौड़े पड़े हैं। भागमभाग के बीच तथास्तु में मैराथन की सामर्थ्य वाला स्टॉक…औरऔर भी






