इनका साथ साल-छह माह ही काफी
बाज़ार में हर तरह का सामान मिलता है। प्याज से लेकर मोबाइल और सोने के जेवर तक। इनकी उपयोगिता और उम्र भिन्न होती है। सफर में भांति-भांति के लोग मिलते हैं। लेकिन सफर की यारी ज्यादा नहीं चलती। इसी तरह कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जिनका साथ साल-छह महीने के लिए ही काफी होता है। इतने वक्त में उनसे मुनाफा कमाकर निकल लेना चाहिए। नहीं तो फसान हो जाती है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी
है कहां मुनाफे का वो अधिकतम स्तर!
हम अपने मुनाफे को अधिकतम संभव स्तर तक दौड़ाकर ले जाना चाहते हैं। लेकिन वो अधिकतम स्तर पहुंचा है या नहीं, इसका फैसला कैसे करें? छह-सात महीने पहले कहते थे कि जुलाई तक निफ्टी 7000 तक जाएगा। लेकिन वो तो कब का 7800 से ऊपर जाकर 7600 के आसपास डोल रहा है। भाव कल की सोचकर चलते हैं, लेकिन कल असल में क्या होगा, कोई नहीं जानता। कुछ संकेतक इशारा ज़रूर करते हैं। अब शुक्रवार की दशा…औरऔर भी
विदेशी निवेशक कहीं जाने लगे तो!
घरेलू अर्थव्यवस्था से अच्छी खबरें आ रही हैं। पहले थोक और रिटेल मुद्रास्फीति जून में घट गई। अब देश का निर्यात जून में 10.22% बढ़ गया। इससे पहले अप्रैल में निर्यात 5.26% और मई में 12.4% बढ़ा था। लेकिन बाहर की खराब खबर यह है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की प्रमुख ने कहा है कि रोज़गार की स्थिति सुधरती रही तो वहां ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। इससे एफआईआई वापस जा सकते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
तरीके और भी हैं रिस्क संभालने के
लोग शेयर बाज़ार को भयंकर ललचाई नज़र से देखते हैं। खासकर तेज़ी के मौजूदा माहौल में वे गारंटी चाहते कि कोई शेयर कितना बढ़ेगा। बड़े मासूम हैं वो कि नहीं समझते कि बाज़ार में पक्की गारंटी जैसी कोई चीज़ नहीं होती। यहां रिस्क है जिसे सफलतम ट्रेडर को संभालना पड़ता है। पहले स्टॉप-लॉस से लोग इसे संभालते थे। अब रिस्क मैनेजमेंट के दूसरे तरीके भी आ गए हैं। घटी मुद्रास्फीति ने बाज़ार को संभाला है। अब आगे…औरऔर भी






