इस दुनिया में कुछ भी अकारण नहीं, खासकर शेयर बाज़ार में तो कतई नहीं। सहज मानव स्वभाव के चलते हम जो होता है, उसकी वजह तलाशने में जुट जाते हैं। लेकिन सहजता ध्यान में चलती है, धंधे में नहीं। धंधे का वसूल है कुछ चीज़ों को नज़रअंदाज़ कर कुछ पर फोकस करना। कामयाब ट्रेडर को इससे मतलब नहीं कि शेयर इधर-उधर क्यों भागा। उसका फोकस है कि इस चाल से कमाया कैसे जाए। अब मंगलवार की चाल…औरऔर भी