ऐसा मत समझिएगा कि खाद्य सुरक्षा बिल पास होने के बाद हम अंगुली पकड़ने के बाद पहुंचा पकड़ने लगे हैं। ये खाद्य सुरक्षा से भी ज्यादा वाजिब सवाल और मांग है जो खैरात नहीं है। खाद्य बिल भले ही हमे अहसास कराए कि सरकार हम पर अहसान कर रही है, बिना इस अहसास के साथ कि आज़ादी के 66 साल जिसमे 55 साल कांग्रेस का शासन था, कांग्रेस को आज भी लगता है कि 84 प्रतिशत नागरिकोंऔरऔर भी

डॉलर का 66.30 रुपए हो जाना सरकार की अदूरदर्शी नीतियों का नतीजा है। इसे संभालने का कोई शॉर्टकट नहीं। समस्या यह है कि भारतीय मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की उत्पादकता घट गई है। दुनिया में भारतीय मालों के पिटने से हमारा व्यापार घाटा 195 अरब डॉलर हो चुका है। सेवा उद्योग और अनिवासी भारतीय देश में 105 अरब डॉलर ला रहे हैं। इस तरह बची 90 अरब डॉलर की कमी कोहराम मचाए हुए है। फिर, कैसे बढ़े शेयर बाज़ार?औरऔर भी