जियोडेसिक में जियो का पलड़ा भारी!
शेयर बाजार में निवेश करना है तो हमें लॉटरी खेलने की मानसिकता से मुक्त होना होगा। शेयरों के भाव कभी भी वर्तमान या अतीत से नहीं, बल्कि कंपनी के कामकाज व नकदी प्रवाह के भावी अनुमानों से तय होते हैं। और, भविष्य को कोई भी ठीक-ठीक नहीं जान सकता। इसलिए शेयर बाजार के निवेश में जमकर जोखिम है। दिक्कत यह है कि हम शेयरों में निवेश करते वक्त रिटर्न की बात सोच-सोचकर लार तो टपकाते हैं। मगर,औरऔर भी
लांगटर्म का मिथ और बाजार के मंत्र
मान्यता है कि शेयर बाजार लंबे समय में फायदा ही देता है। लेकिन यह कोई निरपेक्ष सच नहीं है। इसकी सच्चाई का फैसला ‘कहां और कैसे’ से तय होता है। मसलन, जापान का निक्केई सूचकांक बीस साल पहले अक्टूबर 1992 में 16767 अंक पर था। अगस्त 1993 में 21,027 और जून 2006 में 22,757 तक चला गया। लेकिन फिर गिरने का सिलसिला शुरू हुआ तो अभी अक्टूबर 2012 में 8596 अंक पर आ चुका है। बीस सालऔरऔर भी








