समाज बार-बार जमकर जड़ होती और टूटकर फिर से बनती सत्ता का नाम है। यथास्थिति बनी रही तो कुशल है। अन्यथा बवाल मच जाता है। नया कुछ करनेवालों को समाज का बहुमत नकारता है। लेकिन अल्पमत को लेकर वही लोग नया समाज बनाते हैं।और भीऔर भी