बड़े-बड़े विद्वानों और अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि जनवरी में भारत का औद्योगिक उत्पादन बहुत बढ़ा तो साल भर पहले की अपेक्षा 2.1 फीसदी ही बढ़ेगा। इस निराशा की वजह थी कि अक्टूबर 2011 में औद्योगिक उद्पादन बढ़ने के बजाय 5.1 फीसदी घट गया था। इसके अगले महीने नवंबर में यह 5.9 फीसदी बढ़ा, पर दिसंबर में फिर बढ़ने की रफ्तार घटकर 1.8 फीसदी पर आ गई। लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से सोमवार को जारी त्वरितऔरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था जल्दी ही 8-9 फीसदी की ऊंची सालाना विकास दर की राह पर वापस आ जाएगी। यूपीए सरकार की मुखिया के रूप में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सोमवार को यह दावा किया। वे संसद के बजट सत्र के पहले दिन राज्यसभा और लोकसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि मौजूदा  आर्थिक विकास दर भी अच्छी है। बता दें कि हमारी अर्थव्यवस्था की विकास दर साल भर के 8.4 फीसदी सेऔरऔर भी

वित्तीय जगत से जुड़े अधिकांश विश्लेषकों को नहीं लगता कि रिजर्व बैंक आम बजट से पहले गुरुवार, 15 मार्च को ब्याज दरों में कोई कमी करेगा। यह बात समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रायशुमारी से जाहिर हुई है। रॉयटर्स ने 20 विश्लेषकों से पूछा कि क्या रिजर्व बैंक रेपो दर को 8.5 फीसदी से घटा देगा? इसके जवाब में 17 विश्लेषकों ने कहा है कि ऐसा नहीं होने जा रहा। दो महीने पहले जनवरी में इसी तरहऔरऔर भी

बाजार आज तकरीबन पांच मिनट को छोड़कर बाकी दिन भर ऊपर बना रहा। सेंसेक्स 0.48 फीसदी की बढ़त लेकर 17,587.67 और निफ्टी 0.49 फीसदी की बढ़त के साथ 5359.55 पर बंद हुआ। लेकिन एमसीएक्स नीचे में 1214 रुपए तक चला गया। यह मेरी उस धारणा की पुष्टि करता है कि आईपीओ में ओवर-सब्सक्रिप्शन ऊपर से कराया गया था, मैनेज किया गया था और जो भी मांग दिखाई गई, वह बनावटी थी। यही वजह है कि जिन लोगोंऔरऔर भी

पेट्रोन इंजीनियरिंग नाम के अनुरूप इंजीनियरिंग व कंस्ट्रक्शन के काम में लगी कंपनी है। तेल व गैस, रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल, उर्वरक, सीमेंट व बिजली जैसे उद्योगों को अपनी सेवाएं बेचती है। यह 1976 में बनी कंपनी है। चार साल पहले तक पूरी तरह भारतीय कंपनी हुआ करती थी। लेकिन जनवरी 2008 के बाद से इसका नियत्रंण एक ब्रिटिश कंपनी काज़ स्ट्रॉय सर्विसेज (केएसएस) के हाथ में चला गया है। वैसे तो केएसएस के पास कंपनी की 20.13 फीसदीऔरऔर भी

सृजन व पीड़ा में अभिन्न रिश्ता है। प्रकृति ने तो सृजन की हर प्रक्रिया के साथ खुशी व उन्माद के ऐसे भाव जोड़ रखे हैं कि पीड़ा गौड़ हो जाती है। सामाजिक सृजन में इंसान को यह काम खुद करना पड़ता है।और भीऔर भी