दुनिया ही नहीं, इस सृष्टि की हर चीज हर पल बदलती रहती है। लेकिन परिवर्तन का यह नियम अगर आप किसी आम किसान से पूछेंगे तो वो कहेगा कि ऐसा नहीं है क्योंकि उसकी दुनिया तो कभी बदलती ही नहीं। सूरज के निकलने से लेकर डूबने तक का वही चक्र। न सावन हरे, न भादो सूखे। देश के आम आदमी से पूछेंगे तो वह भी कहेगा कि हां, चीजें बदलती जरूर हैं, लेकिन बेहतर नहीं, बदतर हीऔरऔर भी

कहीं एक तारा टूटकर डूब गया। देखा आपने? कहीं एक कोंपल पेड़ की अकाल मौत से कुम्हला कर सूख गई। देखा आपने? आपके अंदर का इंसान निर्वासित हो गया। अजीब हैं! कुछ भी क्यों नहीं देखते आप?और भीऔर भी