हमारी सोच यही है कि जो मिल जाता है, उसे हम मिट्टी समझते हैं जो खो जाता है, उसे सोना। शेयर बढ़ जाए तो उससे उतनी मोहब्बत नहीं होती और हम उसे आसानी से बेचकर निकल लेते हैं। लेकिन गिर जाए तो इतना सदमा लगता है कि जान ही निकल जाती है। फिर भी मोहब्बत वैसी, जैसी बंदरिया अपने मरे हुए बच्चे से करती है। सीने से चिपकाकर दिनोंदिन डोलती रहती है। यह निपट भावना है, बुद्धिमानीऔरऔर भी

बुद्धि के बिना हम क्षितिज के पार नहीं देख सकते। इसीलिए हमारी याददाश्त भी बड़ी कमजोर होती है। इसका फायदा दुष्ट लोग उठाते हैं। वे बार-बार संत का भेष बनाकर आते हैं और हमें लूटकर चले जाते हैं।और भीऔर भी