कभी सोचा है आपने कि केवल भारतीय ट्रेडरों और निवेशकों को ही इतनी ज्यादा वोलैटिलिटी, इतना भयंकर झंझावात क्यों झेलना पड़ता है? क्या आपने कभी सुना है कि अमेरिका का डाउ जोन्स सूचकांक लेहमान संकट व डाउनग्रेड जैसे विशेष हालात के अलावा सामान्य स्थिति में कभी दो दिन के अंदर 5% ऊपर-नीचे हुआ हो? लेकिन भारत में हर तीन महीने पर ऐसा होता है। बाजार को 5% का फटका लगता है, निवेशकों की दौलत में भारी सेंधऔरऔर भी

विवेक बघार डाला स्वार्थों के तेल में। आदर्श खा गए! कीचड़ में धंस गए!! अब तक क्या किया, जीवन क्या जिया! बहुत-बहुत ज़्यादा लिया, दिया बहुत-बहुत कम। मर गया देश। अरे, जीवित रह गए तुम!!और भीऔर भी