वैश्विक मंदी के बादल छंटने के बाद भारत में आईटी क्रांति नये सिरे से जोर पकड़ रही है। लोगबाग अब डेस्कटॉप कंप्यूटर की बजाय लैपटॉप व टैबलेट कंप्यूटर जैसे उत्पादों पर ध्यान दे रहे हैं, जिन्हें आवश्यकता अनुसार कहीं भी इस्तेमाल किया जा सके। बाजार विशेषज्ञ कहते हैं कि नए साल में कंप्यूटर की दुनिया में नोटबुक, टैबलेट और ई-रीडर जैसे उत्पादों का बोलबाला रहने का अनुमान है। इसी तरह कीबोर्ड तथा माउस जैसे उपकरण भी धीरे-धीरेऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2009-10 में देश में कुल 123.52 लाख जीवन बीमा पॉलिसियां लैप्स हो गई हैं। यह संख्या साल भर पहले 2008-09 में लैप्स हुई 91.08 लाख पॉलिसियों से 35.61 फीसदी अधिक है। सबसे ज्यादा चौंकाने की बात यह है कि पारदर्शिता की बात करनेवाली बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) ने हाल ही में जारी अपनी 2009-10 की सालाना रिपोर्ट में इस बाबत स्पष्ट जानकारी देने से परहेज किया है। उसने सभी 22 जीवन बीमा कंपनियों केऔरऔर भी

बॉम्बे डाईंग के साथ ऐसा क्या बुरा हो गया जो उसे इस सेटलमेंट में ठोंककर 575 रुपए से 458.75 रुपए तक पहुंचा दिया गया? आज भी यह 525.90 और 510.10 रुपए के बीच झूला  है। 2 दिसंबर से 10 दिसंबर के बीच तो इसे  575 रुपए से गिराकर 458.75 रुपए पर पटक दिया गया। इसके डेरिवेटिव के साथ भी यही हरकत हुई है। इस दरम्यान कंपनी के साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जो उसके स्टॉक कोऔरऔर भी

गार्डन सिल्क मिल्स का जिक्र इसी कॉलम में हम तीन बार कर चुके हैं कि इसका पी/ई अनुपात काफी कम है और इसमें बढ़त की काफी गुंजाइश है। पहली बार 16 अगस्त को, जब बीएसई में इसका बंद भाव 83.60 रुपए था। फिर 30 अगस्त को जब ठीक पिछले कारोबारी दिन अचानक यह एकबारगी दस फीसदी से ज्यादा उछलकर ऊपर में 95.85 रुपए तक चला गया था। और तीसरी बार 30 सितंबर को जब यह 102.80 रुपएऔरऔर भी

सब धान बाइस पसेरी तौलनेवाले पंसारी की दुकान चला सकते हैं, नया नहीं ला सकते। समाज, संस्था या कहीं भी बदलाव लाना हो तो पहले उसके आज को बड़ी बारीकी से गहना-समझना पड़ता है।और भीऔर भी