दूसरे सरकारी नेताओं को तो छोड़िए, हमारे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी तक दबी जुबान से कहते रहे हैं कि खाने-पीने की चीजों के महंगा हो जाने की एक वजह लोगों की बढ़ी हुई क्रयशक्ति है। खासकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गांरटी जैसी योजनाओं के चलते गरीब लोगों की तरफ से खाद्यान्नों की मांग बढ़ गई। वे पहले से ज्यादा खाने लगे हैं जिसका असर खाद्य मुद्रास्फीति के बढ़ने के रूप में सामने आया है। लेकिन रिजर्व बैंकऔरऔर भी

बाजार में करेक्शन या गिरावट को लेकर और भी डराने वाली रिपोर्टें जारी की जा रही हैं। ऐसे में पहले से डरे हुए ट्रेडर और निवेशक डिलीवरी आधारित सौदों से बचने लगे हैं और बाजार में शॉर्ट करने के मौके तलाश रहे हैं। लेकिन यह सब रोलओवर की तकलीफ है जिसे हमें झेलना ही पड़ेगा। इसी माहौल में मंदडियों के हमलों के तमाम सिद्धांत फैलाए जा रहे हैं। लेकिन नया सेटलमेंट शुरू होते ही ये सारे सिद्धांतऔरऔर भी

डीसीएम लिमिटेड का शेयर (बीएसई कोड – 502820, एनएसई कोड – DCM) महीने भर पहले 23 जुलाई को 69.45 रुपए पर बंद हुआ था। कल 23 अगस्त को उसका बंद भाव 101.80 रुपए रहा है। इस तरह महीने भर में इसने 46.6 फीसदी का रिटर्न दिया है। मैजूदा भाव पर भी कंपनी का शेयर महज 2.51 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है क्योंकि उसका ठीक पिछले बारह महीने (टीटीएम) का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 40.48औरऔर भी

ये सही, वो गलत। ये अच्छा, वो बुरा। अनजाने में ही नैतिकता की एक तराजू लिए चलते हैं हम। एक माइंड सेट बन जाता है हमारा। लेकिन नया कुछ पाने के लिए पुराने माइंट सेट को ठोंकना-पीटना जरूरी होता है।और भीऔर भी