राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितता के नए-नए खुलासों ने सरकार को देश के भीतर या बाहर कहीं भी मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा है। इसने कांग्रेस आलाकमान को काफी परेशान कर दिया है। उसी के दबाव में खुद प्रधानमंत्री कार्यालय ने कैबिनेट सचिव को खेलों से जुड़े तमाम स्टेडियमों का मुआयना करने का निर्देश दिया है। साथ ही राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति की कार्यकारिणी की विशेष बैठक 5 अगस्त, गुरुवार को बुलाईऔरऔर भी

देश के अग्रणी स्पॉट एक्सचेंज एनएसईएल पर ई-गोल्ड और ई-सिल्वर के सौदों से स्टोरेज सरचार्ज वापस ले लिया गया है। एक्सचेंज के एक सर्कुलर के अनुसार एक अगस्त से ई-गोल्ड व ई-सिल्वर में सौदा करनेवाले कारोबारियों व निवेशकों को कोई सरचार्ज नहीं देना पड़ेगा। एक्सचेंज ने डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स को भी आदेश दिया है कि वे डीमैट वाले ई-गोल्ड और ई-सिल्वर के सौदों पर कोई सरचार्ज न वसूलें। एक्सचेंज की इस पहल से कारोबारियों और निवेशकों का सालानाऔरऔर भी

बड़ी आम-सी बात हो गई है कि जब दुनिया के बाजार बढ़ते हैं तो हमारे बाजार में करेक्शन आ जाता है। भारतीय शेयर बाजार कल काफी बढ़े। लेकिन आज जब दुनिया के बाजार बढ़त पर थे तब हम कमोबेश ठंडे पड़े रहे। यह काफी समय से हो रहा है। हो सकता है कि यह इंट्रा-डे ट्रेडरों को छकाने की चाल हो। व्यापक तौर पर माना जा रहा है कि निफ्टी का 5500 के ऊपर जाना बेहद मुश्किलऔरऔर भी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स जून 1990 में 850 अंक पर था। जून 2000 में यह 4850 अंक पर पहुंचा और अब जून 2010 में 17,700 अंक पर। इस तरह 20 साल में इसने मूलधन को 20 गुना बढ़ा दिया है। सालाना चक्रवृद्धि दर से देखें तो इसने 1990-2000 के दौरान 18.8 फीसदी और 2000-2010 के बीच 14.1 फीसदी सालाना रिटर्न दिया है। पूरे दो दशकों का औसत सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न 16.4 फीसदी का है।औरऔर भी

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को अंग्रेजी में हमारे पूंजी बाजार का वॉच डॉग कहा जाता है और वाकई लगता है कि वह बड़ों पर भौंकने और छोटों को काटने का काम करता है। सेबी ने 7 जून को रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (आरएनआरएल) और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर में ‘डीलिंग’ के मामले में इन कंपनियों के अलावा अनिल अंबानी और समूह के चार अन्य बड़े अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 9 जून को यह नोटिसऔरऔर भी

निटको कंपनी या ब्रांड के नाम से शायद आप परिचित होंगे। 1953 में बनी कंपनी है और टाइल्स व मार्बल का धंधा करती है। टाइल्स वह मुंबई के बाहर अलीबाग में बनाती है और इटली, स्पेन, चेकोस्लवाकिया व चीन जैसे देशों से आयातित मार्बल की प्रोसेंगिग मुंबई के भीतर कांजुर मार्ग में करती है। कंपनी ने 2009-10 में कुल मिलाकर 8.71 करोड़ रुपए का घाटा उठाया था। लेकिन मार्च 2010 की तिमाही में वह 2.50 करोड़ रुपएऔरऔर भी

सच कहें तो धंधा और कुछ नहीं, बस दूसरों से जुड़ने की कोशिश है। उस समान चीज को पकड़ने का उपक्रम है जो सबमें है, सबकी जरूरत है। कंपनियां सर्वे से इसका पता लगाती हैं और ज्ञानी अपनी अंतर्दृष्टि से।और भीऔर भी